15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंडल को फारुख और उमर अब्दुल्ला से मिलने की इजाजत
जम्मू कश्मीर अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35a की समाप्ति के बाद वहां के हालात पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है। पहले ही किसी भी तरह की आतंकवादी घटना या जन विद्रोह के मद्देनजर वहां पर फोन सेवाएं और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई थीं। इसके अलावा अलगाववादी नेताओं के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के स्थानीय नेताओं को भी केंद्र सरकार ने नजरबंद कर लिया था। इनमें महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला भी शामिल थे।
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को फारुख और उमर अब्दुल्ला से मिलने की इजाजत दे दी है। इसकी जानकारी नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता मदन मंटू ने दी। यह प्रतिनिधिमंडल रविवार को नेशनल कांफ्रेंस के दोनों बड़े नेताओं से मिलने के लिए देवेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में निकल जाएगा।
रविवार सुबह रवाना होगा 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल
जम्मू के शेर ए कश्मीर भवन में बैठक के बाद नेशनल कांफ्रेंस के स्थानीय नेताओं ने अपने वरिष्ठ नेताओं को इतने लंबे समय तक नजरबंद किए जाने को लेकर नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं फारूक और उमर अब्दुल्ला से मिलने की मांग की थी। जिसके बाद जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उनको अब यहां इजाजत दे दी है। जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीने जाने के बाद से ही नेशनल कांफ्रेंस के दोनों वरिष्ठ नेताओं को जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ नजरबंद कर दिया गया था।
नजरबंदी के बाद फारुख अब्दुल्ला ने कही थी यह बात
केंद्र सरकार द्वारा नजरबंद किए जाने के तुरंत बाद ट्वीट करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि मुझे नहीं पता कि क्या होने वाला है। मगर मैं यह जानता हूं कि अल्लाह सबके लिए अच्छा करेगा। सभी को मेरी तरफ से शुभकामनाएं। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य में अशांति है। कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है मगर मैं कारगिल, जम्मू और लद्दाख के लोगों से यह अपील करना चाहता हूं कि वह सब शांति बनाकर रखें।
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